1
रावण के दस मुंह थे ,बीस भुजाएं थीं .सोने की लंका थी .रावण के चलने से धरती डोलती थी. रावण रावण था .उसके सामने कोई नहीं था .इंद्र और वरुण पानी भरते थे .शनि राहू आदि अनिष्टकारी ग्रहों को उसने तहखाने में बंद कर रखा था .कुबेरों ने खजाना खोल दिया था ..टीवी चेनल दसों मुंह से उसके विजय की घोषणा कर रहे थे .रावण हुंकार रहा था ,विजय के उन्माद में दहाड़ रहा था .सीतायें भय के मारे विलाप भी नहीं कर पा रही थीं .चारो तरफ से विभीषण उसकी शरण में आ रहे थे .हिरन दुबक गए थे .फूल खिलने से डर रहे थे ,पत्तियां भय से काँप रही थीं . मारे भय के नदियों का बहाव रुक गया था .पहाड़ हिले हुए थे ......क्योंकि सत्य का मुंह विज्ञापन से ढका हुआ था .
विज्ञापन एक ख़ास तरह की बनियान का था .कहना मुश्किल था कि महानायक के पहनने से बनियान खास हो गयी थी या बनियान पहनने से उसमे जादुई गुण आ गए थे . लेकिन यह बात साफ़ दिख रही थी कि वह आसमान से तारे तोड़ कर ला रहा था .जादू की अदृश्य छड़ी उसके हाथ में थी .सब उसकी छड़ी पर भरोसा करने को बाध्य थे .अचानक वह मदारी की तरह प्रकट हो गया था .बाकी लोग जमूरे की तरह उस्ताद उस्ताद रट रहे थे . रटते रटते सबका गला सूख रहा था .इक्कीसवी सदी में त्रेतायुग आ पंहुचा था . सत्य का मुंह विज्ञापन से ढका हुआ था .( हिंदी कवि लीलाधर जगूड़ी के कविता संग्रह का शीर्षक )
रावण के दस मुंह थे ,बीस भुजाएं थीं .सोने की लंका थी .रावण के चलने से धरती डोलती थी. रावण रावण था .उसके सामने कोई नहीं था .इंद्र और वरुण पानी भरते थे .शनि राहू आदि अनिष्टकारी ग्रहों को उसने तहखाने में बंद कर रखा था .कुबेरों ने खजाना खोल दिया था ..टीवी चेनल दसों मुंह से उसके विजय की घोषणा कर रहे थे .रावण हुंकार रहा था ,विजय के उन्माद में दहाड़ रहा था .सीतायें भय के मारे विलाप भी नहीं कर पा रही थीं .चारो तरफ से विभीषण उसकी शरण में आ रहे थे .हिरन दुबक गए थे .फूल खिलने से डर रहे थे ,पत्तियां भय से काँप रही थीं . मारे भय के नदियों का बहाव रुक गया था .पहाड़ हिले हुए थे ......क्योंकि सत्य का मुंह विज्ञापन से ढका हुआ था .
विज्ञापन एक ख़ास तरह की बनियान का था .कहना मुश्किल था कि महानायक के पहनने से बनियान खास हो गयी थी या बनियान पहनने से उसमे जादुई गुण आ गए थे . लेकिन यह बात साफ़ दिख रही थी कि वह आसमान से तारे तोड़ कर ला रहा था .जादू की अदृश्य छड़ी उसके हाथ में थी .सब उसकी छड़ी पर भरोसा करने को बाध्य थे .अचानक वह मदारी की तरह प्रकट हो गया था .बाकी लोग जमूरे की तरह उस्ताद उस्ताद रट रहे थे . रटते रटते सबका गला सूख रहा था .इक्कीसवी सदी में त्रेतायुग आ पंहुचा था . सत्य का मुंह विज्ञापन से ढका हुआ था .( हिंदी कवि लीलाधर जगूड़ी के कविता संग्रह का शीर्षक )
2
नारद की छवि विज्ञापन से गढ़ी गयी है
नारद जी धरती पर फिर आये है .काफी समय बाद आये हैं सो धूम मची है .टीवी के हर चेनल पर छाये हैं –कभी समाचार के रूप में ,कभी ब्रांड के रूप में ,कभी विज्ञापन के रूप में .क्यों आये हैं ? उन्हें फिर एक मोहिनी भा गयी है . सपने में मोहिनी को देखा और फ़िदा हो गए .उन्हें पता चला की मोहिनी का स्वयंवर होने वाला है . मोहिनी दिल्ली वाली है .अद्भुत रूप है मोहिनी का .सब उसके पीछे पगलाए घूम रहे हैं .नारद जी क्या करें! ऐसा निराला रूप कहाँ से पायें ! विष्णु ,न बाबा न ,अबकी विष्णु के चक्कर में पड़ना नहीं हैं –कैसा तो छल किया था ,पिछली बार .मारे क्रोध से कांपने लगे नारद .विष्णु को पता भी नहीं चलना चाहिए .पहले की ही तरह नारद को अपनी छवि पर भरोसा नहीं था . सो ,वे सबसे बड़ी ,सबसे महँगी सबसे नामी विज्ञापन कंपनी के पास गए. छवि बनाने का ठेका हो गया .विज्ञापन कंपनी ने नारद की छवि गढ़ दी . दुनिया से निराली .नारद गदगद घूम रहे हैं- दूल्हे का वेश धरे जयमाला हाथ में लिए .अपनी छवि पर मुग्ध .अपनी वाणी पर मुग्ध .कब स्वयंवर हो ,जयमाला पड़े .कभी कभी आईने के सामने अकेले बैठकर निहारते हैं , छवि देख कर निहाल हो उठते हैं .जयमाला अपने ही हाथों बार बार गले में डालते हैं ,निकालते हैं .विष्णु को मजा चखाने की कसमे खाते हैं .चीखते हैं ,चिल्लाते हैं ,हुंकारते हैं .
और विष्णु तो विष्णु हैं ,उन्हें सब पता है .सो चुपके से विज्ञापन कम्पनी खोल ली है .उनकी विज्ञापन कंपनी सबसे बड़ी ,सबसे महँगी और सबसे नामी है.
3
वे
मरने के बाद वे धर्मराज के पास ले जाए गए .धर्मराज ने कागज पत्तर देख कर बताया कि आप ने कुछ अच्छे काम किये हैं और कुछ बुरे .लिहाजा थोड़े थोड़े दिन स्वर्ग में और थोड़े दिन नरक में रहना पड़ेगा .अब आप ही बतायें -पहले कहाँ जाएंगे ? .थोड़ी देर सोचने के बाद बोले –क्या ऐसा नहीं हो सकता कि दोनों का एक चक्कर लगा लूं फिर तय करूं? . धर्मराज मान गए . पहले वे स्वर्ग ले जाए गए –वहां का माहौल बड़ा शांत था .गांधीजी टैगोर से बतिया रहे थे .बगल की कुटियामें कबीर थे . उनको कुछ किसान मजदूर टाइप लोग घेरे हुए थे, चर्चा चल रही थी .एक तरफ रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद दुनिया जहान की बातें कर रहे थे.तरह तरह के फूल खिले हुए थे .नदिया कल कल करती हुयी बह रही थीं .खेतों में फसल लहलहा रही थी .पक्षी कलरव कर रहे थे ,किसान मगन थे .जो ही मिलता मुस्कराकर अभिवादन करता ..उन्हें अच्छा लग रहा था. वे फैसला करने को थे कि नरक का प्रतिनिधि बोला –आइए सर ,हमारे यहां भी विजिट कर लीजिये .उन्होंने सोचा देख लेने में क्या हर्ज़ है?और नरक की ओर चल पड़े . नरक के प्रवेश द्वार तक पंहुचा कर स्वर्ग का प्रतिनिधि चला गया .जाते जाते अपना विजिटिंग कार्ड भी देता गया .ताकि वक्त ज़रूरत काम आये .
मरने के बाद वे धर्मराज के पास ले जाए गए .धर्मराज ने कागज पत्तर देख कर बताया कि आप ने कुछ अच्छे काम किये हैं और कुछ बुरे .लिहाजा थोड़े थोड़े दिन स्वर्ग में और थोड़े दिन नरक में रहना पड़ेगा .अब आप ही बतायें -पहले कहाँ जाएंगे ? .थोड़ी देर सोचने के बाद बोले –क्या ऐसा नहीं हो सकता कि दोनों का एक चक्कर लगा लूं फिर तय करूं? . धर्मराज मान गए . पहले वे स्वर्ग ले जाए गए –वहां का माहौल बड़ा शांत था .गांधीजी टैगोर से बतिया रहे थे .बगल की कुटियामें कबीर थे . उनको कुछ किसान मजदूर टाइप लोग घेरे हुए थे, चर्चा चल रही थी .एक तरफ रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद दुनिया जहान की बातें कर रहे थे.तरह तरह के फूल खिले हुए थे .नदिया कल कल करती हुयी बह रही थीं .खेतों में फसल लहलहा रही थी .पक्षी कलरव कर रहे थे ,किसान मगन थे .जो ही मिलता मुस्कराकर अभिवादन करता ..उन्हें अच्छा लग रहा था. वे फैसला करने को थे कि नरक का प्रतिनिधि बोला –आइए सर ,हमारे यहां भी विजिट कर लीजिये .उन्होंने सोचा देख लेने में क्या हर्ज़ है?और नरक की ओर चल पड़े . नरक के प्रवेश द्वार तक पंहुचा कर स्वर्ग का प्रतिनिधि चला गया .जाते जाते अपना विजिटिंग कार्ड भी देता गया .ताकि वक्त ज़रूरत काम आये .
नरक में दाखिल होते ही उनका करतल ध्वनि से स्वागत हुआ .फूल बरसाए गए .रिसेप्शनिस्ट ने
अदब से कहा सर थक गए होंगे.थोडा विश्राम कर लें .कुछ चाय पानी कर लें.हम्मरे यहाँ बिलकुल नए
ब्रांड की चाय आई है ,पिटे ही थकान उतर जायेगी . फिर आगे जाइएगा .नरक के इस स्वागत
से वे गद गद हो रहे थे .खास ब्रांड की चाय पीकर आगे
बढ़ने को हुए तभी नरक के प्रतिनिधि ने उन्हें एक डियो लगाया . तेज खुशबू आकाश तक फ़ैल
गयी ,.देखते क्या हैं कि ऊपर से अनेक सुंदरियां परियों के से अंदाज़ में उतर रही हैं .नरक के प्रतिनिधि ने कहा - आगे की
यात्रा ये लोग कराएंगी.वे खुश हुए .सुंदरियां उन्हें एक विशाल माल में ले गयीं
.वहां बेहद चमकीली रोशनी थी .सब कुछ चमक रहा था .सब कुछ रंगीन था . रंग और
रोशनी की चकाचौंध में वे डूब से गए गए .सुंदरियों थीं ,रंग थे ,चमक थी ,आने वाले खूबसूरत दिनों का खुशनुमा एहसास था . वहां दुःख भी रंगीन था उन्हें सच्चा आनंद हो रहा था .सुन्दरिर्यों ने उनसे आगे चलने
के लिए कहा –वे मंत्रमुग्ध से बोले ,नहीं अब आगे कुछ नहीं देखना ,कुछ नहीं
सुनना .मैंने निर्णय कर लिया है .मैं यही रहूँगा .उन्हें वापस स्वागत कक्ष तक लाया गया . रजिस्टर में बाकायदा इंट्री कर दी गयी .अब उन्हें नरक में ले जाया गया . यह असली नरक बिलकुल असली
नरक जैसा था .वे डर गए .उनकी रूह कांपने लगी .उन्होंने ने नरक के
कर्मचारी से सहमते हुए पूछा - और वह जगह किधर है जहाँ मैं विजिट के लिए आया था .कर्मचारी कुटिल हसी हंसते हुए बोला –वह हमारा विज्ञापन विभाग था .वे घबडा
कर बोले – मैं अपना निर्णय बदलता हूँ –मैं स्वर्ग में ही चलूँगा . .स्वर्ग के प्रतिनधि का कार्ड निकाला और
उसका नंबर मिलाने लगे,जिस पर लगातार आ रहा था –जो नंबर लगा रहे हैं वह पंहुच से दूर
है.उन्हें बताया गया –एक बार आ जाने के बाद पांच साल तक आप कहीं नहीं जा
सकते .
वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मतदाता थे .
वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मतदाता थे .