शुक्रवार, 7 मार्च 2014

करती रही इन्तजार (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर एक कविता )



जब मैं सीता थी
अपने वनवासी पति का सिर गोद में लिए

बैठी ही तो थी


भविष्य की बाट जोहती
देवताओं के राजा इन्द्र के बेटे जयन्त ने
मेरी छातियों को लहूलुहान कर दिया

जब मैं अहिल्या थी 
अपनी कुटिया में सोयी आधी नींद में
पति गौतम का इन्तजार करती हुई
देवताओं के राजा इन्द्र के
छलात्कार का शिकार बनीं

आकाश में चमकने वाला चन्द्रमा
सिर्फ गवाह नहीं था 
पूरे वाकये में शामिल था 

देवताओं का देवत्व 
इस कदर बरपा 
कि मैं
पथरा गई

जब द्रौपदी हुई 
अपने पाँचो पतियों की अनुगामिनी
(
सनद रहे कि 
मैंने नहीं वरा था पाँच पतियों को
माता कुन्ती केआदेश से 
बाट दी गयी बराबर बराबर)
मैं नहीं खेल रही थी जुआ
सिर्फ दाँव पर चढ़ा दी गयी थी
मैं हारी नही थी
सिर्फ जीत ली गयी थी
लायी गयी दुर्योधन की सभा में
पाँचो पतियों के पास
और दु:शासन के पशुबल से
अपमानित हुई

कोई साधारण सभा नहीं थी वह
वहाँ पितामह भीष्म थे
वहाँ द्रोणाचार्य थे
वहाँ कृपाचार्य थे
और जाने कौन कौन से आचार्य थे
सब धृतराष्ट्र थे
एक स्त्री निर्वस्त्र की जा रही थी
और यह महान सभा देख रही थी
महारथी चुप थे
रश्मिरथी चुप थे
आचार्य चुप थे
इतिहासवेत्ता
नीति निर्माता
सब चुप थे

सोचती हूँ क्यों चुप थे सब!

कि दोष मेरा ही था
कि मेरे परिधान दोषी थे
नहीं तो 
मेरे स्त्री शरीर का दोष तो होगा ही होगा

मैं इस स्त्री शरीर का क्या करूँ
जिसको लिए दिए
देवताओं
महारथियो
आचार्यो 
के
कल, बल, छल का 
शिकार होती रही
पत्थर बनती रही
मुक्ति के लिए
किसी पुरुष के पैरों की ठोकर का 
करती रही
इन्तजार।

बुधवार, 5 मार्च 2014

चापलूसी हमारे देश के डीएनए में है

मुलायम सिंह जी ने अपने बेटे अखिलेश यादव की उत्तर प्रदेश सरकार को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया की यह सरकार चापलूसों से घिरी हुयी है . आज के समय में मुलायम सिंह शायद अकेले ऐसे नेता हैं जो अपनी और अपने बेटे के सरकार की खुली आलोचना कर सकते हैं .
मुलायम सिंह को यह तो मालूम होगा कि जहाँ सत्ता होगी वहां चापलूसी होगी ही होगी ..आजकल हमारी राजनीतिक शब्दावली में नया शब्द शामिल हुआ है -डीएनए .हमारी पार्टी देश के डीएनए में है , ईमानदारी हमारी पार्टी के डीएनए में है,या बेईमानी और भ्रष्टाचार हमारे विरोधियों के डीएनए में है .इस शब्दावली में कहें तो कह सकते हैं कि चापलूसी हमारे देश के डीएनए में है .इसके प्रमाण वेदों से मिलते हैं .(हालांकि चापलूस मार्तंड उपाधि से विभूषित एक प्रोफ़ेसर ने हाल ही में भरी सभा में फरमाया कि १८५७ में डीएनए नहीं होता था ,डीएनए को अभी दो ढाई साल पहले मेरे मौजूदा बॉस ने बनाया है.और बॉस के कार्यकाल में वे अपनी मान्यता में कोई बदलाव करने को तैयार भी नहीं हैं. उनसे क्षमा याचना सहित मैं ऋग्वेद से कुछ उदहारण देना चाहता हूँ -'सोमरस का पान करने वाले हे इन्द्रदेव !आप सोम ग्रहण करने हेतु हमारे सावन यज्ञों में पधार कर,सोमरस पीने के बाद प्रसन्न होकर याजकों को यश ,वैभव और गौएँ प्रदान करें .' ..'जिससे देखने वाले सभी शत्रु और मित्र हमें सौभाग्य शाली समझें.'(ऋग्वेद सूक्त -4)ऋग्वेद में यह भी कहा गया है कि हे देव मैं जिन शब्दों में आपकी अभ्यर्थना की है उन शब्दों में दूसरा कोई भी आपकी अभ्यर्थना नहीं कर सकता इसलिए मुझे धन पद प्रतिष्ठा दीजिये .वेद हमारे सबसे आदरणीय ग्रन्थ हैं ,इसलिए ये बातें हमारे डीएनए में है .कुछ दिन पहले मुलायम सिंह जी भी चापलूसों से घिरे ही थे .तो चापलूसी हमारी समाज व्यवस्था की चालक शक्ति है . सुर नर मुनि ही नहीं किन्नर भी इससे चालित होते हैं .किसी विश्वविद्यालय ,सरकार ,कार्यालय ,मठ,आश्रम में चले जाइये चापलूसों का बोलबाला है .किस्सा कोताह यह कि सत्ता का केंद्र चाहे जितना छोटा या बड़ा हो वहां चापलूसी के दीमक लगे हुए हैं .और केन्द्रों ,विश्वविद्यालयों ,संस्थानों को ही नहीं सरकारों को भी चाट जा रहे हैं .माननीय मुलायम सिंह जी ने चापलूसों के खिलाफ हल्ला बोला है .देखना यह है कि इस लड़ाई को वे कहाँ तक आगे ले जाते हैं ....