गंग ओ जमुन
क्या आपने इलाहाबाद में
जमुना को गंगा में मिलते हुये देखा है
जमुना जितनी गंगा में मिलती है
उतनी ही गंगा मिल जाती है जमुना में
अब गंगा पहले की तरह गंगा नहीं रही
जैसे जमुना नहीं रही पहले जैसी जमुना
दोनों मिलकर बन गईं कोई तीसरी नदी
जिसे हम गंगा कहते हैं
और जमुना को भूल जाते हैं
बिना यह सोचे कि दृ
जमुना अगर नहीं मिलती गंगा से
तो गंगा कैसी होती
कितनी और किस हाल में ।
नालंदा के लोग क्यों डरते हैं ?
किस्सा है
नालंदा के एक शख्स का
बड़े काबिल थे
इल्मी थे
शायर थे
दाना थे
नालंदा में प्रोफ़ेसर थे
दूर दूर तक उनकी दानाई के किस्से
मशहूर थे
लोग आते थे
लोग जाते थे
अखबारों में चर्चे थे
नादान दोस्तों से घिरा एक परदेशी
किसी दाना की तलाश में
नालंदा आ पंहुचा
किसी बच्चे से पूछा -
यहाँ कोई दाना रहता है
बच्चे ने उनके घर की ओर इशारा करते हुए कहा
वहां ,वहां
परदेशी फट पंहुच गया दाना के घर
और बोला
मैं नादान दोस्तों से घिरा हूँ
मुझे एक ऐसे शख्स की तलाश है जो
दाना हो
दोस्त हो या दुश्मन
बड़ी उम्मीद से आया हूँ
आपके पास
बच्चा बच्चा जानता है कि आप दाना है
वे खुश हुए
यह जानकार कि
बच्चा बच्चा जानता है वे दाना है
अपनी दानाई पर रीझते चले गए वे
इस कदर रीझे कि
खुद को
दाना और सिर्फ दाना के रूप में जानने लगे
यहीं एक गड़बड़ हुयी
दाना का एक पुराना अर्थ
चुपचाप चिपक गया
दाना से
वे सोचने लगे
चिड़िया तो दाना का बस एक ही अर्थ जानती है
अगर उसने मुझे दाना समझा और
चुग गयी तो
मेरा तो सब गड़बड़ हो जाएगा
सारा इल्म
सारा ज्ञान सारी दानाई धरी रह जायेगी
उन्हें चिड़िया की भाषा आती थी पर चिड़िया को उनकी भाषा नहीं आती थी
वे चिड़िया से डरने लगे
घर बाहर निकलना हुआ बंद
ले जाये गए पागलखाने
इलाज हुआ
ठीक हुए
छुट्टी होने को थी
खुश थे डॉक्टर ने पूछा
अब कैसा लगता है
बोले ठीक लगता है
लगता है की मैं मुकम्मल आदमी हूँ
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
डॉक्टर खुश था अपनी सफलता पर
कि वे पूछ बैठे
डॉक्टर साहेब एक मुश्किल है
क्या ?
यह तो ठीक है कि मैं आदमी हू
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
लेकिन यह बात चिड़िया को कैसे पता चलेगी
और वे फिर डर गए .
शताब्दियाँ बीत गयीं
तब से
नालंदा के लोगों में
डर का जींस समाया हुआ है
इसीलिए डरते हैं नालंदा के लोग
मैंने बहुतों से प्रेम किया
आदर दिया बहुतों को
सामर्थ्य भर सहायता भी की कईयों की
दोस्त बनाये ढेर सारे
पर एक एक कर सबने छोड़ दिया
जहाँ का तहां
प्रेमी सच्चे प्रेम की तलाश में
निकल लिए आगे
जिन्हें आदर दिया
वे सेवक समझ बैठे
जिनकी सहायता की
उन्होंने अपना अधिकार समझा
दोस्त तो खैर दोस्त ही थे
उनकी क्या कहें
जीवन की कठिन बीहड़ लड़ाई में
साथ साथ वे रहे
जिन्हें मैंने नहीं बनाया था
खुद-ब-खुद आ गए थे साथ
अहैतुक (सच्ची वैष्णव कृपा तो अहैतुक ही ठहरी )
जहाँ -जहाँ नहीं पहुँच सकता था
वहां पहुँचाया मुझे
जो-जो मैं नहीं कर सकता था
उसका श्रेय दिया मुझे
चलते रहे मेरे आगे आगे
रास्ता सुझाते
सच्चे प्रेमी थे वे
मैं भले ही उन्हें भूल गया होऊं
वे कभी नहीं भूले
सच्चे अभिभावक थे
नेक सलाह देते रहे
सच्चे दोस्त थे
कभी साथ नहीं छोड़ा
अब तक जो हूँ
उनकी वजह से हूँ
उनका आभारी हूँ
२
उनके लिए
मैंने आँगन में कुटी
छ्वा रखी है
अनुभव वृद्ध कवि
मैंने उन्हें नियरे रखने की
बारहां कोशिश की है
अनुभव वृद्ध कवि
पर वे इस कुटिया में
आने से कतराते रहे
छिटक छिटक जाते रहे
अब तुम्ही बताओ
अनुभव वृद्ध ज्ञान वृद्ध कवि
उन्हें नियरे राखने के लिए
और क्या उपाय करूँ?
धुनिया
रुई धुनने के अलावा
उसे आता नहीं था कुछ
और रुई थी ही नहीं
अब क्या धुनें –
अपना सिर
जुलाहे
न बचा सूत
न बचा कपास
फिर आपस में लठठम लठठा क्यों ?
नाविक
नदियाँ सुख गयीं
नावें हुईं गायब
न पार जाने का उपाय
न डूबने का विकल्प
गडेरिया
भेंड़े गायब थीं
गडेरिया चिंतित
कहाँ जाएँ
क्या चराएं ?
कुम्हार
मिटटी बची नहीं
चक गया टूट
बच गया डंडा
अब क्या करें इसका ?
गाडीवान
न रहे बैल
न रही गाड़ी
किसको बैठाएं
और कहाँ पहुचाएं
मैं जिससे बरसों से प्यार करता रहा हूँ
उसे कितना जानता हूँ
जितना उसे रोज -ब-रोज देखता हूँ
या देख पाता हूँ
रूप और रंग से
देह और धजा से
दफ्तर से घर
घर से दफ्तर
आते जाते
बाजार से खरीदे हुए
सामानों से
उस घर से
जिसमे वह रहती है
उन फूलों से
उन पौधों से
वनस्पतियों से
जिन्हे वह बेहद प्यार करती है
उन किताबों से जिन्हें वह पढ़ती रहती है
उसकी उच्छल हंसी से
आखों में तैरते सपनों से
या दुनिया जहान की उन तमाम बातों से
या फिर बातों के बीच में
ठमक कर निकल पडने वाले
अव्यक्त हूँ से
चुपचाप बहाने वाली दर्द की नदी से
कभी न उठनेवाली कराह से
बालों में उग आई सफेदी से
पीछे छूट गयी प्रेम कहानियों से
चाहने वालों के भीतर ठहर गयी आह से
या फिर उसके सतत वर्तमान से
मैं जिससे सालों साल प्यार करता रहा हूँ
उसे कितना जान पाया हूँ
उसे जानने की अदम्य जिज्ञासा में
मेरी इन्द्रियां हैं
जो अपने समूचे बोध के साथ सक्रिय हैं
मन लगा हुआ है अनथक
पर क्या उसे सचमुच जान पाया हूँ
जिससे सालों साल प्यार करता रहा हूँ
आखिर में
मैंने पाया कि
प्यार
किसी को जानने का
असफल
किन्तु सतत प्रयास है
नालंदा के लोग क्यों डरते हैं ?
किस्सा है
नालंदा के एक शख्स का
बड़े काबिल थे
इल्मी थे
शायर थे
दाना थे
नालंदा में प्रोफ़ेसर थे
दूर दूर तक उनकी दानाई के किस्से
मशहूर थे
लोग आते थे
लोग जाते थे
अखबारों में चर्चे थे
नादान दोस्तों से घिरा एक परदेशी
किसी दाना की तलाश में
नालंदा आ पंहुचा
किसी बच्चे से पूछा -
यहाँ कोई दाना रहता है
बच्चे ने उनके घर की ओर इशारा करते हुए कहा
वहां ,वहां
परदेशी फट पंहुच गया दाना के घर
और बोला
मैं नादान दोस्तों से घिरा हूँ
मुझे एक ऐसे शख्स की तलाश है जो
दाना हो
दोस्त हो या दुश्मन
बड़ी उम्मीद से आया हूँ
आपके पास
बच्चा बच्चा जानता है कि आप दाना है
वे खुश हुए
यह जानकार कि
बच्चा बच्चा जानता है वे दाना है
अपनी दानाई पर रीझते चले गए वे
इस कदर रीझे कि
खुद को
दाना और सिर्फ दाना के रूप में जानने लगे
यहीं एक गड़बड़ हुयी
दाना का एक पुराना अर्थ
चुपचाप चिपक गया
दाना से
वे सोचने लगे
चिड़िया तो दाना का बस एक ही अर्थ जानती है
अगर उसने मुझे दाना समझा और
चुग गयी तो
मेरा तो सब गड़बड़ हो जाएगा
सारा इल्म
सारा ज्ञान सारी दानाई धरी रह जायेगी
उन्हें चिड़िया की भाषा आती थी पर चिड़िया को उनकी भाषा नहीं आती थी
वे चिड़िया से डरने लगे
घर बाहर निकलना हुआ बंद
ले जाये गए पागलखाने
इलाज हुआ
ठीक हुए
छुट्टी होने को थी
खुश थे डॉक्टर ने पूछा
अब कैसा लगता है
बोले ठीक लगता है
लगता है की मैं मुकम्मल आदमी हूँ
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
डॉक्टर खुश था अपनी सफलता पर
कि वे पूछ बैठे
डॉक्टर साहेब एक मुश्किल है
क्या ?
यह तो ठीक है कि मैं आदमी हू
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
लेकिन यह बात चिड़िया को कैसे पता चलेगी
और वे फिर डर गए .
शताब्दियाँ बीत गयीं
तब से
नालंदा के लोगों में
डर का जींस समाया हुआ है
इसीलिए डरते हैं नालंदा के लोग
नालंदा के लोग क्यों डरते हैं ?
किस्सा है
नालंदा के एक शख्स का
बड़े काबिल थे
इल्मी थे
शायर थे
दाना थे
नालंदा में प्रोफ़ेसर थे
दूर दूर तक उनकी दानाई के किस्से
मशहूर थे
लोग आते थे
लोग जाते थे
अखबारों में चर्चे थे
नादान दोस्तों से घिरा एक परदेशी
किसी दाना की तलाश में
नालंदा आ पंहुचा
किसी बच्चे से पूछा -
यहाँ कोई दाना रहता है
बच्चे ने उनके घर की ओर इशारा करते हुए कहा
वहां ,वहां
परदेशी फट पंहुच गया दाना के घर
और बोला
मैं नादान दोस्तों से घिरा हूँ
मुझे एक ऐसे शख्स की तलाश है जो
दाना हो
दोस्त हो या दुश्मन
बड़ी उम्मीद से आया हूँ
आपके पास
बच्चा बच्चा जानता है कि आप दाना है
वे खुश हुए
यह जानकार कि
बच्चा बच्चा जानता है वे दाना है
अपनी दानाई पर रीझते चले गए वे
इस कदर रीझे कि
खुद को
दाना और सिर्फ दाना के रूप में जानने लगे
यहीं एक गड़बड़ हुयी
दाना का एक पुराना अर्थ
चुपचाप चिपक गया
दाना से
वे सोचने लगे
चिड़िया तो दाना का बस एक ही अर्थ जानती है
अगर उसने मुझे दाना समझा और
चुग गयी तो
मेरा तो सब गड़बड़ हो जाएगा
सारा इल्म
सारा ज्ञान सारी दानाई धरी रह जायेगी
उन्हें चिड़िया की भाषा आती थी पर चिड़िया को उनकी भाषा नहीं आती थी
वे चिड़िया से डरने लगे
घर बाहर निकलना हुआ बंद
ले जाये गए पागलखाने
इलाज हुआ
ठीक हुए
छुट्टी होने को थी
खुश थे डॉक्टर ने पूछा
अब कैसा लगता है
बोले ठीक लगता है
लगता है की मैं मुकम्मल आदमी हूँ
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
डॉक्टर खुश था अपनी सफलता पर
कि वे पूछ बैठे
डॉक्टर साहेब एक मुश्किल है
क्या ?
यह तो ठीक है कि मैं आदमी हू
किसी अनाज का दाना नहीं हूँ
लेकिन यह बात चिड़िया को कैसे पता चलेगी
और वे फिर डर गए .
शताब्दियाँ बीत गयीं
तब से
नालंदा के लोगों में
डर का जींस समाया हुआ है
इसीलिए डरते हैं नालंदा के लोग