क्या आपने इलाहाबाद में
जमुना को गंगा में मिलते हुये देखा है
जमुना जितनी गंगा में मिलती है
उतनी ही गंगा मिल जाती है जमुना में
अब गंगा पहले की तरह गंगा नहीं रही
जैसे जमुना नहीं रही पहले जैसी जमुना
दोनों मिलकर बन गईं कोई तीसरी नदी
जिसे हम गंगा कहते हैं
और जमुना को भूल जाते हैं
बिना यह सोचे कि दृ
जमुना अगर नहीं मिलती गंगा से
तो गंगा कैसी होती
कितनी और किस हाल में ।
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