शुक्रवार, 3 जून 2011

अम्बेडकर पार्क में अम्बेडकर की प्रतिमा देखकर

एक महान कविता की तरह
सुन्दर और सुगठित है
लखनऊ का अम्बेडकर पार्क

किसी भोर की उजास में
अगर आप पार्क के सबसे ऊँचे टीले से देखें
तो
गोमती के किनारे बसे इस शहर की
इन्द्र धनुषी आभा
आपको अपने जादू से मोहित कर लेगी।

संभव है लखनऊ की इस सुन्दरता को
सबसे पहले देखा हो किसी गड़रिये ने
जो अपनी भेंड़ों को लिए दिए
किसी साँझ पहॅुच गया हो
इसी टीले के आस-पास
जरूर आर्किटेक्ट को पार्क का नक्शा
मिला होगा
उस गड़रिये की आखों में।

पार्क के बीचो बीच
एक गुंबद की सी आकृति के
नीचे
मौजूद है अम्बेडकर की भव्य प्रतिमा

आमतौर पर अम्बेडकर की प्रतिमाएँ
स्टीरिओ टाइप होती हैं-
एक हाथ में संविधान की पोथी
दूसरे हाथ से रास्ता दिखाते
नीले परिधान में दिख जाते हैं अम्बेडकर
जिन्हें प्यार से बाबा साहब कहा जाता है

यह प्रतिमा बिल्कुल अलग है
बाबा साहब कुर्सी पर बैठे हैं
आराम की मुद्रा में

ध्यान से देखें तो उनकी आखों में
एक सपना तैरता हुआ दिखेगा
क्या यह नया विधान रचने का सपना है?
अम्बेडकर के चेहरे पर चिन्ता की रेखायें हैं
कि कब और कैसे संभव होगा उनके सपनों का विधान?

मुझे लखनऊ के अम्बेडकर पार्क में
अम्बेडकर की प्रतिमा इसी चिन्ता में डूबी हुर्इ मिली।


सुख एक बासी चीज है

काला हॉडी के लोग
सुख की नींद सोते हैं
क्योंकि उनके पास कुछ भी नहीं है
जिसकी चिन्ता में उन्हें नींद न आये
इसीलिए सेठ सामन्त उन्हें कहते हैं
सुखवासी
इसे सुनते सुनते इतने अभ्यस्त हो गये हैं
कालाहॉडी के लोग
वे ठीक ठीक इन्हीं अर्थों में अपने को
समझते हैं सुखवासी
रोटी की तलाश में भटकती
उस आदिवासी औरत ने बताया
सुखवासी होने का मतलब-

‘हमारे जीवन में सुख एक बासी चीज है।’

खोयी हुयी कविता को याद करते हुएहुआ यह कि
एक शहर से दूसरा शहर
एक घर से दूसरा घर
बदलते हुए
मेरी एक कविता खो गयी
एक मामूली सी कविता
जो शायद
दिन भर गुब्बारा बेंच कर लौट रहे
किसी मामूली आदमी के बारे में थी
भला बताइए
कि तेजी से भागती इस दुनिया में-
जिसमें सदियों से बटोरी गर्इ
बेशकीमती चीजें खोती चली जा रही हों
एक मामूली से कवि की
मामूली सी कविता का खोना
क्या ऐसी बात है
जिसकी नोटिस ली जाय
पर करूं तो क्या करूं
कि वक्त बेवक्त मुझे याद आ जाती है
वह खोयी हुर्इ कविता
और बेचैन कर जाती है
कोर्इ मुझे बताये
कि इस जगमगाती दुनिया में
महज एक खोर्इ हुर्इ कविता
क्यों कर जाती है बेचैन?

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