शनिवार, 28 मई 2011

हमारे समय में : कुछ कवितायें

आखिर ये माजरा क्या है?



महात्मा गांधी मार्ग दीनदयाल मार्ग में
बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर मार्ग
मनु मार्ग में मिल जाता है।

लोहिया मार्ग पर चलते हुए
पहुँच जाते हैं धीरू भार्इ अम्बानी मार्ग पर

लेनिन पथ जहाँ खत्म होता है
वहीं से शुरू होता है सेठ धनश्याम दास बिड़ला मार्ग

भगत सिंह मार्ग
विनोवा भावे मार्ग से मिलकर
अनुशासन पर्व मनाने लगता है।
गौतम बुद्ध मार्ग
शंकराचार्य मार्ग में
संतकबीर मार्ग
महंत रामगोपालदास मार्ग में विलीन हो जाता है।

रामकृष्ण परमहंस मार्ग पर चलते हुए
इस भ्रम में न रहें
कि आप ऐन विवेकानन्द मार्ग की ओर जा रहे हैं
यह भी संभव है कि
आप जहाँ पहुँचे
वहाँ लिखा मिल जाय- चन्द्रा स्वामी मार्ग।

फीदेल कास्त्रो मार्ग
कब और किस तर्क से
श्रीमंत माधवराव सिन्धिया मार्ग से जा मिले
कहना मुश्किल है।

हमारे समय में
सारे के सारे रास्ते
जाते कहीं और हैं
बताते कुछ और हैं
आखिर ये माजरा क्या है?





2.
गहरी नींद में

भटके हुए लोग
रास्ता बता रहे हैं।
और वे जो बेतहाशा भागे जा रहे हैं
गहरी नींद में हैं।

3.
इस साझा अभियान में

अब सही दिषा का ज्ञान कराने वाले कुतुबनुमें
एक जुर्म हैं
कानूनन अपराध
कुतुबनुमें तलाशे जा रहे हैं
नष्ट किये जा रहे हैं- कुतुबनुमें
सेठ, साहूकार, नेता, अफसर, पुलिस
धर्मोपदेशक, महन्त और माफिया
सब जुटे हैं
इस साझा अभियान में।
4.
नये नये कुतुबनुमें

नये फैशन के कुतुबनुमें
आ गये हैं- बाजार में
भव्य और आकर्षक
शानदार पैकिंग में
डिजिटल और रिमोट वाले

ऐसे
कि समय और अवसर देखकर
उत्त्ार को
पूरब, पश्चिम या दक्षिण
कुछ भी बता सकते हैं

एक्सचेंज आफर चल रहा है
पुराने कुतुबनुमें
जो अभी भी बेशर्मी से
उत्त्ार को उत्त्ार बताये जा रहे हैं
उन्हें ले आइए
और ले जाइए
चालू फैशन के
नये नये कुतुबनुमें।









5.
बन गये हैं बोन्सार्इ

बोन्सार्इ
महज एक प्रविधि भर नहीं है
अनिवार्यता है
पाकड़, पीपल और बरगद के बोन्सार्इ
जिसमें
पाकड़, पाकड़ नहीं
पर पाकड़ से बेहतर है

पीपल, पीपल नहीं
पर पीपल से बेहतर है

बरगद, बरगद नहीं
पर बरगद से बेहतर है

महत्वाकांक्षाओं के चमचमाते गमलों में
सपनों और संभावनाओं से रहित
बोन्सार्इ/सुन्दर, सजावटी और सुविधाजनक
जब चाहिए जहाँ चाहिए
उठाकर रख लीजिए

बुद्ध, कबीर, विवेकानन्द
माक्र्स एंगेल्स लेनिन
गांधी लेाहिया आम्बेडकर
भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस
प्रेमचन्द, निराला, राहुल
सब बोंसार्इ फार्म मे उपलब्ध हैं
मास स्केल पर चल रहा है यह कारोबार

नर्सरी से लेकर विश्वविद्यालयों तक
मानव संसाधन विकास के
अनेक उपक्रम
तकनीकी संस्थान
प्रबन्ध संस्थान
अनवरत लगे हुए हैं-
इस उद्यम में
ध्यान से देखिए
आप अभी तक कितने प्रतिषत आदमी बचे रह गये हैं
और कितने प्रतिशत
बन गये हैं बोन्सार्इ।







6.
अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे

आर्इने
बिल्कुल जादुर्इ हैं
रार्इ को पर्वत
और परबत को रार्इ बना सकते हैं
मुहाबरे के बिल्कुल उलट
परबत को रार्इ के नीचे खड़ा करके
कह सकते हैं
लो देखो
अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे।
7.
महान विचारों को सुरक्षित धर देने का समय
महान आत्माओं को
महान प्रतिमाओं में बदलने का समय है
पहले पत्थर तराशे जाते हैं
फिर भर दिये जाते हैं
मन चाहे रंग
इस तरह तैयार होती हैं
महान प्रतिभाओं की
महान प्रतिमाएं

फिर उन्हें स्थापित कर दिया जाता है
उनके विचारों के ठोस चबूतरे पर
इस कौशल से
कि विचार फुदकते हुए
कही इधर-उधर न चले जायँ
किन्हीं आकुल दिमागों में
इस तरह महान प्रतिमाओं के तले
महान विचारों को
सुरक्षित धर देने का समय है।

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